Lava International: Send It Back Campaign - Granth
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Lava International: Send It Back Campaign

Lava International: Send It Back Campaign

सच और झूठ! क्या फर्क है इनमें? वैसे क्या ही फर्क पड़ता है। हमें क्या करना है ‘सच के सच होने से’ और ‘झूठ के झूठ होने से’? या फिर वाकई हमें फर्क पड़ता है?

सवाल काफी पेचीदा है लेकिन अगर इंसान चाहे तो इसका जवाब अपनी समझदारी से पल भर में हासिल कर सकता है। मोबाइल ब्रांड, लावा इंटरनैशनल लिमिटेड का नया कैंपेन सच और झूठ के इन्हीं फासलों को दूर करता दिखता है।

गणतंत्र दिवस के मद्देनज़र कंपनी ने #SendItBack नाम से एक कैंपेन लॉन्च किया है। ये कैंपेन जितना करारा है, उतना ही रेलेवेंट भी, क्योंकि इसमें एक ऐसे मुद्दे पर फोकस किया गया है जो अक्सर हमें झकझोर कर रख देता है। ये कैंपेन मुख्यतः fake forwards यानि गलत या अफवाहों भरे मोबाइल संदेशों पर आधारित है, जिनकी वजह से हिंसा या मॉब लिंचिंग जैसी घटनायें सामने आतीं हैं। लिंचिंग जैसी घटनायें न सिर्फ किसी की ज़िंदगी छीन लेती हैं बल्कि इंसानियत को भी शर्मसार होने पर मजबूर कर देतीं हैं।

कैंपेन की बात करें, तो इसे बड़ी ही समझदारी के साथ बनाया गया है। करीब दो मिनट के टाइमफ्रेम में बना यह विज्ञापन आपको बड़ी ही सहजता के साथ fake forwards के नकारात्मक पहलू से परिचित  करवाता है। साथ ही इस बावत जागरूक भी करता है कि ऐसे मोबाइल संदेशों पर हमें कैसे रिऐक्ट करना चाहिए। देखा जाये तो मैसेजिंग के मामले में भी यह काफी प्रभावी है। इसके अलावा मोबाइल संदेशों से जुड़ी चीज़ों को आधार बनाते हुए जिस तरह से इस विज्ञापन का ट्रीटमेंट किया गया है, वो भी काफी काबिल-ए-तारीफ है। ये कैंपेन सीधे आपसे बात करता है। इस बीच, सबसे अच्छी बात है इसकी टाइमिंग। भला गणतंत्र दिवस से बेहतर वक्त और क्या हो सकता था इस कैंपेन के लिए, क्योंकि यही वो अवसर होता है जब हमारे दिलों में देशप्रेम और ज़िम्मेदारी निर्वाह करने की भावना कुछ ज़्यादा उफान पर होती है।

कैंपेन की खास बातें-

  • प्रासंगिकता- इस मामले में यह कैंपेन काफी उपयुक्त नज़र आता है क्योंकि अक्सर हमारे सामने मॉब लिंचिंग जैसी घटनायें घटित होती रहती हैं। ऐसे में यह कैंपेन हमें ऐसी घटनाओं का हिस्सा बनने से अथवा जाने-अनजाने उसका कारक बनने से रोकता है।
  • ऐक्टिव मैसेजिंग- चूंकि ये कैंपेन हमें जागरूक करने के साथ-साथ हमें ऐक्ट करने के लिए बाध्य करता है, यह एक अच्छी रणनीति है। इसमें न सिर्फ प्रॉब्लम की बात कही गयी है, बल्कि सॉल्यूशन का भी ज़िक्र किया गया है।
  • इमोजी कनेक्शन- इस विज्ञापन में इमोजी कनेक्शन बिल्ड करने की कोशिश की गयी है। अक्सर हम forward मैसेजेस पर इमोजी के ज़रिये ही रिऐक्ट करते हैं। हम उन मैसेजेस को आगे भेजते हैं, जबकि यह विज्ञापन हमें बिना जाँचे-परखे ऐसे किसी भी संदेश को आगे भेजने से रोकता है। इस लिहाज़ से यह विज्ञापन काफी क्रियेटिव है।
  • अवेयरनेस- अवेयरनेस के मामले में भी यह विज्ञापन 100 में से 100 नंबर का हकदार है।

बहरहाल हमें लगता है कि यह विज्ञापन वक्त की ज़रूरत भी है। लिहाज़ा इस प्रयास के लिए ब्रांड लावा इंटरनैशनल बधाई का हकदार है, जो उसने इस विषय को चुना। वहीं, उससे भी ज़्यादा बधाई 82.5 कम्यूनिकेशन्स को दी जानी चाहिए जिसने इसे इतनी अच्छी तरह से परिकल्पित करने के साथ-साथ एक्ज़ीक्यूट भी किया है। उम्मीद है कि ये कैंपेन हम भारतीयों को एक बेहतर सोच विकसित करने तथा बेहतर व्यवहार करने के लिए प्रेरित करेगा।

और हाँ, अंत में टीम ग्रंथ की ओर से आप सभी देशवासियों को गणतंत्र दिवस की हार्दिक बधाईयां। इस गणतंत्र दिवस खुशियाँ आगे बढ़ायें, fake forwards नहीं। जाते-जाते लिंक पर क्लिक कर लावा का यह कैंपेन देख ही लीजिए। शायद दो मिनट का यह विज्ञापन आपमें जन, गण, मन की भावना को बनाये रखने में मदद करें।

ब्रांड- lavainternational.com

परिकल्पना- 82.5 कम्यूनिकेशन्स

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