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“ओ जी…वेलकम है जी आपका…आइए-आइए!! इंडिया के बेस्ट होटेल में। किंग साइज़ रूम, फुल्ली एसी, 55 इंच एलईडी टीवी, फ्री वाई-फाई  और 24 घंटे सर्विस”।

कुछ समय पहले तक हमें कुछ ऐसी ही लाइनें सुनने को मिला करतीं थीं, जब हम घूमने-फिरने या फिर किसी काम के सिलसिले में दूसरे शहर जाते थे और किसी हॉटेल में स्टे किया करते थे। लेकिन शुक्र है होटेल बुकिंग ऐप्स का जिन्होंने हमारी मुश्किलें काफी हद तक आसान कर दीं हैं क्योंकि अब ऐसी लुभावनी लाइनें हमें झाँसा नहीं दे पाती हैं।

कल तक हम मरता क्या न करता की स्थिति में हॉटेल वालों की उंगलियों पर नाचने पर मजबूर हुआ करते थे, लेकिन आज हम हॉटेल चुनने से लेकर, अपना रूम बुक करने तक और इवन उसकी पेमेंट तक अपनी उंगली के इशारे पर तय कर लेते हैं। ख़ैर, अब हम ज़्यादा समाँ न बाँधते हुए असल मुद्दे पर आते हैं। असल मुद्दा ये है कि “OYO” ने कुछ ही समय पहले रहो मस्त नाम से 3 विज्ञापनों की एक सीरीज़ निकाली है। ये सीरीज़ हॉटेल बुकिंग और हमारे स्टे के बीच आने वाली उलझनों और एक्सपीरिएंसेस पर ही आधारित हैं। खास बात ये है कि इन विज्ञापनों को एक ह्यूमरिस्टिक टच दिया गया है जो होटेल बुकिंग से जुड़ी हमारी दुखती रग को दबाते तो हैं ही, लेकिन साथ ही साथ वो किसी stress और pain reliever की तरह भी काम करते हैं। यहाँ कहने का मतलब ये है कि विज्ञापन बहुत ही अच्छे बन पड़े हैं।

“रहो मस्त” कैंपेन के पहले विज्ञापन में एक हॉटेल बुकिंग एजेंट को दिखाया गया है, जो शहर में आने वाले लोगों को अपनी चिकनी-चुपड़ी बातों से कंविंस करने की कोशिश करता दिखता है। अगर आप विज्ञापन में उस एजेंट की लाइनों को सुनेंगे तो विश्वास मानिये आपको अपने खुद के एक्सपीरिएंसेस याद आ जायेंगे।

इस कैंपेन के दूसरे विज्ञापन को भी बहुत अच्छी इंसाइट के साथ बनाया गया है। इसमें वर्क और बिज़नेस ट्रिप के अनुभवों को आधार बनाकर ही आइडिएट किया गया है। इस विज्ञापन में ऐसी सिचुएशन्स को दिखाया गया है जो अक्सर ट्रिप्स के दौरान लोगों को फेस करने पड़ते हैं। इस विज्ञापन में बुरे होटेल्स और उनकी घटिया सर्विसेस के चलते बिज़नेस ट्रिप पर गये एक व्यक्ति के किंग साइज़ लिविंग की आकांक्षाओं पर पानी फिरता दिखाया गया है।

वहीं, तीसरे विज्ञापन में मूवी डेट पर निकले कपल को थीम बनाया गया है। इस विज्ञापन में दिखाया गया है कि उन्हें अपनी डेट में कैसी-कैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है और चाहकर भी उन्हें प्राइवेट मोमेन्ट्स नहीं मिल पाते हैं और ऐसी परिस्थिति में कैसे “OYO” एक बेहतर विकल्प के तौर पर उनके सामने आता है।

अब अगर इस कैंपेन के प्रभाव की बात करें तो कुछ अच्छी बातें निकलकर सामने आती हैं।

  • पहला, आइडिएशन के फ्रंट पर यह विज्ञापन रणनीति सटीक बैठती है।
  • दूसरा “OYO” ने रहो मस्त कैंपेन के ज़रिये जिस तरह से अपनी पोज़िशनिंग को टार्गेट किया है, वो बिल्कुल पर्फेक्ट नज़र आती है।
  • तीसरा, कंविंसिंग पॉवर के मामले में भी यह कैंपेन काफी प्रभावशाली दिखायी पड़ता है। कहीं न कहीं इस विज्ञापन में इस बात पर फोकस किया गया है कि आप भारत में जहां कहीं भी हों, आपका बजट छोटा हो या बड़ा… “OYO” आपकी ज़रूरत को पूरा करता है और साथ ही आपको बेस्ट होटेल स्टे गारंटी करता है।
  • चौथा, अब क्या सबकुछ हमसे ही जानना है? फर्स्ट हैंड एक्सपीरिएंस भी कोई चीज़ होती है मियाँ!! एक काम कीजिए, एक बार “OYO” के रहो मस्त कैंपेन को देख लीजिए, मम्मी कसम छोटे मोटे समीक्षक तो आप भी बन जायेंगे। और रही बात कि आप इन विज्ञापनों को कैसे देखेंगे, तो उसकी चिंता मत कीजिए। नीचे स्क्रॉल कीजिए और लगे हाथ लिंक्स पर जाकर “OYO” का कैंपेन देख ही लीजिए। बाकी हमारी आपसे एक ही सलाह है—- रहो मस्त और जियो अलमस्त

कॉन्सेप्ट- ब्रांडिंग एंड डिज़ाइन टीम, OYO

प्रोडक्शन हाउस- क्रोम पिक्चर्स

डायरेक्शन- हेमंत भंडारी

अगर आप ऐसी और भी इंटरेस्टिंग स्टोरीज़ पढ़ना चाहते हैं, तो #AdKiJhappi  पर जायें।

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