Project StreeDhan - Granth
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Project StreeDhan

ये बात तब की है, जब ऑफिस में हमारे क्रिएटिव हेड ‘इन्वेस्टमेंट’ पर अपना ज्ञान बाँच रहे थे। इसी दौरान हमारे एक टीम मेंबर ने इन्वेस्टमेंट पर कुछ सर्च करना शुरू ही किया था कि उनकी नज़र एक डिजीटल कैंपेन पर गयी, जिसमें ‘इन्वेस्टमेंट’ की बात की गयी थी। लेकिन ये इन्वेस्टमेंट किसी म्यूचुअल फंड, शेयर मार्केट या सोने-चाँदी को लेकर नहीं था, बल्कि उस चीज़ पर था, जिसे हम इन्वेस्टमेंट के लायक ही नहीं समझते। वो चीज़ है तो बहुत कीमती, पर बात जब उस पर इन्वेस्ट करने की आती है, तो सबसे पहले हम ही मैदान छोड़ आते हैं क्योंकि इस इन्वेस्टमेंट में हमें गाँधीजी की तस्वीर नज़र नहीं आती है।

ख़ैर,अपनी सो-कॉल्ड क्रिएटिव राइटिंग स्किल्स को साइड करते हैं और अब सीधे मुद्दे पर आते हैं और बताते हैं कि वो क्या था जिसने हमें आज लिखने पर मजबूर कर दिया।

#InvestInIron, जी यही वो लाइन थी जिसने हमें मजबूर किया कि हम आपके सामने आकर इस पर कुछ बात करें।अब आप इस स्टोरी को बीच में छोड़करलोहा खरीदने मत लग जाइएगा क्योंकि #InvestInIron लोगों में ‘अनीमिया’ के प्रति जागरुकता लाने के लिए तैयार की गयी कैंपेन की लाइन है, जिसे#ProjectStreeDhanकैंपेन में यूज़ किया गया है।

#ProjectStreeDhan…वो कैंपेन है जिसमें महिलाओं के स्वास्थ्य पर फोकस किया गया है, मगर बिल्कुल अलग ही अंदाज़ में। इस विज्ञापन को बहुत ही खूबसूरती से शूट किया गया है और उसमें प्रयोग किया गया म्यूज़िक भी काफी प्रभावी है। अक्सर हेल्थ अवेयरनेस विज्ञापनों में या तो डॉक्टर्स दिखाये जाते हैं, या बीमार लोग। लेकिन इस कैंपेन में न कोई डॉक्टर है और न ही कोई बीमार व्यक्ति। हाँ, लेकिन क्रिएटिव तरीके से बीमारी की बात ज़रूर की गयी है, जो कि एक अच्छा अप्रोच है। इससे इस कैंपेन की मैसेजिंग बहुत इंट्रेस्टिंग हो जाती है।

इस कैंपेन की दूसरी खासियतहै इसके लिरिक्स। गाने के लिरिक्स न सिर्फ स्ट्रॉन्ग है, बल्कि प्रभावशाली भी हैं। “सोना-सोना तू करती है, पर सोना क्या जाने तेरा मोल”। ये लाइन जब आपके कानों में पड़ती है, तभी आपको इसके इम्पैक्ट का अंदाज़ा लग जाता है।दिलचस्प बात ये है कि इस कैंपेन को धनतेरस और दिवाली के आस-पास रिलीज़ किया गया था जब लोग सोने में इन्वेस्ट करने या उसे खरीदने के लिए आतुर रहते हैं। लेकिन आप इस कैंपेन की दिलेरी देखिये कि ये महिलाओं को सोने की जगह लोहे में इन्वेस्ट करने की बात करता है। हालांकि हम फिर बता दें कियहाँ#InvestInIron का अर्थ महिलाओं केशरीर में आयरन की कमी को दूर करने से हैं…और इस गाने की पंच लाइन लोहा चख लेइसी ओर इशारा करती है।

इसके अलावा पूरे विजुअल्स में महिलाओं को खुद को पोषण देते हुए दिखाया गया है, जो कि बहुत ही अच्छी बात है क्योंकि इंडियन महिलाओं में खुद को नरिश्मेंट देने का कॉन्सेप्ट ही नहीं है। आप अपनी मम्मियों को ही देख लीजिए। आखिरी बार आपने उन्हें खुद का ख्याल रखते कब देखा है? सारा समय वो आपके और आपके परिवार की देखभाल में लगी रहती हैं और इस जद्दोजहद में वो खुद को पूरी तरह भूल जाती हैं। हालांकि हमारी भी ज़िम्मेदारी बनती है कि हम उनके पोषण का ध्यान दें, लेकिन हम तो हम हैं, हमारे पास कहाँ वक्त हैं। हमारे लिए तो टीवी का रिमोट, मोबाइल का स्क्रीन और गोसिपिंग जैसी दूसरी सारी चीज़ें मायने रखती हैं, भला इस बीच माँ के लिए कहाँ से वक्त निकाल सकते हैं। वैसे हमारी बातें दिल पर लेने की ज़रूरत नहीं है, बस दिल से उनका ख्याल रखिए, वही बहुत है। अगली बार जब आपकी मम्मी, बहन या कोई क्लोज़ फ्रेंड आपके पोषण को बरकरार रखने के लिए फल, ड्राई-फ्रूट्स या फिर अन्य किसी भी प्रकार के पोषण युक्त खाद्य सामग्री लेकर आये, तो अपनी पेट पूजा से पहले उनके पोषण के बारे में भी सोचें और उन्हें भी बतायें कि ये करना उनके लिए भी कितना ज़रूरी है।

यह कैंपेन एक और खास बात की ओर इशारा करता है। अक्सर जब हम कुपोषण या ऐसी दूसरी अन्य चीज़ों के विज्ञापन देखते हैं तो उसमें 99 पर्सेंट टाइम ग्रामीण भारत ही नज़र आता है। लेकिन इस विज्ञापन की खूबसूरती देखिये कि इसमें कैसे शहरी महिलाओं में होने वाली आयरन डेफिश्येंशी की बात पर ज़ोर दिया गया है, जो कि हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि ऐसी समस्यायें केवल ग्रामीण अंचलों तक ही सीमित नहीं हैं, शहर भी उतने ही प्रभावित हैं। कैंपेन में दिखाये आंकड़ों की माने तो करीब 50 फीसदी शहरी महिलायें आयरन डेफिश्येंशी से जूझ रहीं हैं, जो कि चौंकाने वाला है क्योंकि हमारे हिसाब से तो शहरों में लोग अपने खान-पान और न्यूट्रिशन पर कुछ ज़्यादा ही ज़ोर देते हैं।

शायद इसलिए भी हमें इस कैंपेन ने कुछ ज़्यादा ही प्रभावित किया। हमें लगता है कि जिस उद्देश्य के चलते इस कैंपेन को डिज़ाइन किया गया है… और जिस क्रिएटिव तरीके से उसकी मैसेजिंग तैयार की गयी थी, उसका एक लार्जर इम्पैक्ट होना चाहिए। लेकिन आप लोग शायद ऐसा होने नहीं देंगे। अब हमारी इस बात का बुरा मत मानिएगा, क्योंकि हम तो बस आपको उस सच्चाई से वाकिफ़ करा रहे हैं, जो हमें आँखों के सामने नज़र आती है।

हमारे लिखने पर भी क्या ही हो जायेगा। आपमें से ज़्यादातर लोगों ने उस 60 सेकंड के वीडियो को देखेंगे, दो बार अपनी गर्दन हिलायेंगे औरहल्की फुसफुसाहट के साथ मन में कहेंगे- सही है यार…और दूसरा वीडियो प्ले कर लेंगे। अगर भूले से कुछ लोगों का मन करेगा तो वो ज़्यादा से ज़्यादा एक लाइक का बटन दबा देंगे।फिर क्या?? फिर क्या है, देखेंगे कोई नया वायरल वीडियो या सुनेंगे कोई नया ट्रेंडिंग सॉन्ग। भला इसी के लिए तो हमने सोशल मीडिया में अपनी दबंग इंट्री ली थी। क्यों भाईसाब?

अच्छा ऐसा नहीं है क्या? तो फिर ठीक है। फिर तो हमें लगता है कि आप इस स्टोरी को पढ़ने के बाद वो कैंपेन देखेंगे। उसमें दिये संदेश को आत्मसात करेंगे और प्यार से अपनी मम्मी, बहन या फ्रेंड को कॉल करेंगे या उनसे मिलकर उन्हें बतायेंगे कि पोषण कितना ज़रूरी है उनके लिए। क्योंकि आप उनका ख्याल रखेंगे तभी तो कुछ होगा। तभी तो उनमें खुद से प्यार करने, खुद का ख्याल रखने का जज़्बा जागेगा। और जब ऐसा होगा, तभी तो बदलाव आएगा।

तो देर किस बात की है, स्टोरी तो पढ़ ही ली है, अब वो कैंपेन भी देख लीजिए और उसके बाद जो सही लगे वो कीजिएगा। और अगर हमने कोई चुभने वाली बातें की हैं, तो उसके लिए क्षमा याचना…हाँ बस अब Written Apology मत माँग लेना।क्या है ना…कि हो नहीं पायेगा, स्टोरी आप फ्राइडे को पढ़ेंगे और हमको भी तो वीकेंड की छुट्टी चाहिए होती है, ताकि दोगुनी एनर्जी के साथ आप लोगों के लिए कुछ नया लिख सकें।

विज्ञापन एजेंसी- एफसीबी उल्का

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