Swiggy

लीजिए…एक बार फिर हम आपके लिए कुछ लेकर आये हैं, वो भी कुछ लज़ीज़ सा। मुँह से लार टपकाने की कतई भी ज़रूरत नहीं है क्योंकि न ही हम आपको कोई ट्रीट देने वाले हैं और न ही अभी नवरात्रे चल रहे हैं कि हम आपको माता रानी का लंगर परोसे। हाँ, परोसेंगे तो बस अहले दर्जे का कंटेंट जिससे भले ही आपका पेट न भरे लेकिन आपका दिल ज़रूर गार्डन-गार्डन हो जायेगा।

तो चलिए, अब बात करते हैं उसकी जिसके लिए हमने अपनी कलम में नयी स्याही भरी है । आज जिस ब्रांड पर हम बात करेंगे वो है स्विगी (SWIGGY) जिसने अपनी विज्ञापन रणनीति के ज़रिये एक बार फिर लोगों को प्रभावित किया है। स्विगी ने हाल ही में अपना नया कैंपेन “घर का खाना, साथ में थोड़ा स्विगी” लॉन्च किया है।

इस कैंपेन ने हमें इसलिए भी लिखने को मजबूर किया क्योंकि इसमें हम भारतीयों से जुड़ी एक बड़ी इंसाइट मिलती है और ये इंसाइट खास इसलिए भी है क्योंकि ये हमारे खान-पान से जुड़ी है, जिसमें हम भारतीयों की आत्मा बसती है। लो, आप फिर लार टपकाने लगे!! खाने का नाम नहीं लिया कि आपकी जीभ लपलपाने लगती है। अब मुँह बंद कीजिए और आगे की बात सुनिये।

अब हम बताते हैं कि क्या खास है इस कैंपेन में। कैंपेन में खास है इसका ‘इंसाइट’ जो विज्ञापन रणनीति के लिए अत्यंत आवश्यक है। अगर यह न हो तो टार्गेट ऑडियन्स तक पहुँचना करीब-करीब नामुमकिन सा हो जाता है। बिल्कुल उस तीर की तरह जो अक्सर अपना निशाना चूक जाता है।

इसके अलावा इस कैंपेन के विज्ञापनों को जिस सिंपल तरीके से दर्शाया गया है वो काफी प्रभावित करता है। इन विज्ञापनों को आउट-ऑफ-द-बॉक्स तो नहीं कहा जा सकता, लेकिन ये आपको हिट ज़रूर करते हैं। मतलब स्विगी का तीर निशाने पर है बीड़ू।

दूसरी बात जो सबसे खास है, वो है इसकी ‘क्लेवर राइटिंग’। इसे बहुत सोच-समझकर और सदे हुए तरीके से लिखा गया है। अगर आपने यह विज्ञापन देखा होगा तो पाया होगा कि किस तरीके से स्विगी ने घर के खाने की बात करते हए अपना प्रचार किया है। अक्सर आप और हम घर के खाने को याद करके या तो नोस्टाल्जिया में डूब जाते हैं या फिर स्वाद के समंदर में गोते खाने लगते हैं क्योंकि ईस्ट ओर वेस्ट… घर का खाना इज़ बेस्ट। अरे वाह, हम तो शायर भी बन गये।

चलिए अब बात करते हैं इस कैंपेन के तीसरे खास पहलू की… जो हम भारतीयों की दुखती रग भी है- हर चीज़ में कुछ ‘एक्सट्रा’ ढूँढने की। कुछ लेना हो तो एक्सट्रा ले लो, कोई अच्छा-खासा डिस्काउन्ट मिल भी रहा हो भी थोड़ा एक्सट्रा माँग लो और बात खाने-खिलाने की हो तो उसमें भी थोड़ा एक्सट्रा, फिर चाहे आपके सामने छप्पन भोग ही क्यों न परोसे गये हों। क्या है ना…खाने के साथ हम इंडियन्स की दिल्लगी ही कुछ ऐसी है। अब क्या हमें शादी-ब्याह और पार्टियों में आपकी हरकतों की पोल खोलनी पड़ेगी… जहाँ आप बड़ी शिद्दत के साथ अपनी थाली में पड़े गुलाब-जामुन का रिश्ता अचार से तय कर आते हैं और तंदूरी रोटियों और लच्छे पराठों की इतनी बड़ी थप्पी लगा देते हैं, जितनी थप्पियाँ प्यार से आप अपने बच्चों को सुलाते हुए भी नहीं लगाते!!

बहरहाल, मुद्दे पर आते हैं और स्विगी की विज्ञापन रणनीति पर फोकस करते हैं। एक और पहलू है जिस पर बात की जा सकती है और वो है ‘सेलिब्रेशन’ की। सेलिब्रेशन किसी खास मौके का नहीं, बल्कि अपने परिवार के साथ अपना खाना सेलिब्रेट करने की। इस फ्रंट पर स्विगी की रणनीति एक क्लियर विनर नज़र आती है क्योंकि यहाँ परिवार के साथ भोजन का आनंद लेने की बात पर फोकस किया गया है, जो कि आजकल बहुत कम नज़र आता है। चूँकि सदियों से भारत में परिवार के साथ भोजन को जीवन का अहम हिस्सा माना गया है, स्विगी के विज्ञापन कहीं न कहीं हमें परिवार के और करीब लेकर आते हैं। तो आप किसका इंतज़ार कर रहे हैं? अपने परिवार के साथ थोड़ा वक्त बिताइए…घर के खाने का स्वाद उठाइए और दिल अगर कुछ एक्सट्रा चाहे, तो फिर स्विगी है ना!!

विज्ञापन एजेंसीलो लिंटास
प्रोडक्शन हाउसअर्ली मैन फिम्स
निर्देशकअभिनव प्रतिमान

अगर आप ऐसी और भी इंटरेस्टिंग स्टोरीज़ पढ़ना चाहते हैं, तो #AdKiJhappi  पर जायें।

2020-01-10T10:30:49+00:00

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